जब भी ऊपर की और जाता हूं,वो हर एक कदम सीढ़ियों पर,मानो यह बता रही हो,कि काफी आगे आ गए हो तुम।यह वही जगह थी जहां कभी,जलावन का मचान होता था,वो बोरी में भुस्सी का होना,वो कोने में रखे वो काला सा चूल्हा।आज इन सफेद दीवारों पे,जब हाथ फेरते हुए कदम को आगे रखते है,लगताContinue reading “कामयाबी”
