एक घर

ऊपर दिखा एक, झुकी हुई सी छत, काला सा था, पर उसमे रास्ते भी थे, समय बिता, नजर ऊपर हुई, लेकिन वो छत, धीरे धीरे नीचे आती रही, एक समय था, जब जमीन और उसकी ऊंचाई, का फर्क शून्य था, और वही से शुरुवात हुई, वो दिवारे फिर से उठने लगी, समय का बदलाव था,Continue reading “एक घर”

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