कामयाबी

जब भी ऊपर की और जाता हूं,
वो हर एक कदम सीढ़ियों पर,
मानो यह बता रही हो,
कि काफी आगे आ गए हो तुम।

यह वही जगह थी जहां कभी,
जलावन का मचान होता था,
वो बोरी में भुस्सी का होना,
वो कोने में रखे वो काला सा चूल्हा।

आज इन सफेद दीवारों पे,
जब हाथ फेरते हुए कदम को आगे रखते है,
लगता है मानो बड़ा सा बदलाव हुआ है,
दीवारों की खुशबू से यह आभास भी है।

कहते है जिन घर मे सीढ़िया होती है,
बरक्कत की पहचान है,
सुकून तो तब आता है जब,
उस छत पर खड़े होके खुद से पूछते है-

"यह जो है वही कामयाबी है क्या!!!"

शब्दार्थ:
जलावन - चूल्हे को जलाने के लिए लकड़ियां
मचान- लकड़ी या बांस से बना हुआ प्लेटफार्म जिसपे जलावन रखते है

यह उन सभी हिम्मत वालो के लिए है जिन्होंने कोशिश कर बदलाव लाया है। घर का विकास परिवार की खुशी लाता है और आने वाले समय में परिस्थितियों को संभालने का मनोबल देता है। यही तो सही मायने में अपना अभिमान है।

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